रिश्तों की नई परिभाषा
अक्सर सास-बहू का रिश्ता तकरार और तंज का प्रतीक माना जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के एटा जिले से निकली एक कहानी ने इस सोच को बदल दिया है। यहां एक सास ने अपनी बहू को जीवनदान देकर त्याग और ममता की अनोखी मिसाल पेश की है। जब यह सास-बहू गांव लौटीं तो मोहल्ले वालों ने उन पर फूल बरसाकर और मिठाइयां बांटकर जोरदार स्वागत किया।
बीमारी से जंग की शुरुआत
फर्रुखाबाद की रहने वाली पूजा की शादी नवंबर 2023 में एटा निवासी अश्विनी प्रताप सिंह से हुई थी। फरवरी 2024 में पूजा ने एक बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी के दौरान अचानक उसके पेट में गंभीर संक्रमण फैल गया। यह संक्रमण इतना खतरनाक था कि उसकी दोनों किडनियां 75% तक खराब हो गईं।
परिवार ने कानपुर समेत कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में डॉक्टरों ने पूजा को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल रेफर किया। वहां डॉक्टरों ने साफ कहा कि उसकी जान बचाने का केवल एक ही रास्ता है—किडनी ट्रांसप्लांट।
मां ने किया इनकार, सास ने निभाया फर्ज
डॉक्टरों ने परिवार से कहा कि रिश्तेदारों में से किसी की किडनी मैच हो सकती है। सबसे पहले पूजा की मां से उम्मीद की गई, लेकिन उन्होंने किडनी देने से इनकार कर दिया। ऐसे कठिन समय में सास बीनम देवी ने बिना झिझक आगे बढ़कर कहा—
“अगर मेरी किडनी मैच हो गई, तो मैं अपनी बहू को दूंगी।”
किस्मत ने भी साथ दिया। बीनम देवी का ब्लड ग्रुप पूजा से मैच कर गया। इसके बाद 13 सितंबर को लखनऊ के आरएमएल अस्पताल में सर्जरी हुई और बीनम देवी ने अपनी किडनी बहू को दान कर दी। ऑपरेशन सफल रहा और पूजा की जान बच गई।
बहू हुई भावुक
सर्जरी के बाद पूजा भावुक होकर बोलीं—
“मेरी मां ने किडनी देने से इनकार कर दिया था, लेकिन मेरी सास ने बिना सोचे-समझे अपनी जान दांव पर लगाकर मुझे बचा लिया। आज मैं अपनी बेटी को गोद में लेकर खेल पा रही हूं, ये सब उन्हीं की बदौलत है। भगवान सबको ऐसी सास दें।”
गांव में जश्न जैसा माहौल
करीब एक महीने के इलाज के बाद जब पूजा और उनकी सास बीनम देवी गांव लौटीं तो माहौल भावुक हो गया। पूरे गांव ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। मोहल्ले वालों ने घर-घर मिठाइयां बांटीं और कहा कि ऐसी सास ने रिश्तों की असली परिभाषा बदल दी है।
परिवार और समाज के लिए संदेश
बीनम देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा—
“जब कोई मदद के लिए तैयार नहीं था, तो मैंने सोचा कि अगर मैं अपनी बहू को बचा सकती हूं, तो इससे बड़ा फर्ज कोई नहीं। आज उसे हंसते-जीते देखकर संतोष होता है।”
उनके बेटे अश्विनी प्रताप सिंह ने भी गर्व जताते हुए कहा—
“मां ने साबित कर दिया कि सास-बहू का रिश्ता केवल कहावतों तक सीमित नहीं, बल्कि त्याग और ममता का भी होता है।”
मिसाल बनी सास-बहू
एटा की यह कहानी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। जहां लोग अक्सर सास-बहू के रिश्ते को नकारात्मक रूप में देखते हैं, वहीं बीनम देवी ने यह साबित कर दिया कि यह रिश्ता त्याग, ममता और अपनत्व का भी प्रतीक है।
निष्कर्ष
सास का बहू को किडनी देना केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज को दिया गया एक बड़ा संदेश है। यह कहानी बताती है कि रिश्ते खून के नहीं, बल्कि दिल और भावना के होते हैं।
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